tangent कैलकुलेटर
नतीजा
tangent
tangent कैलकुलेटर किसी भी कोण का tangent निकालता है — कोण के सामने वाली भुजा और उससे लगी आसन्न भुजा का अनुपात, यानी उस रेखा की ढलान जो केंद्र से उस बिंदु तक जाती है जहाँ कोण पहुँचता है। sine ऊँचाई पढ़ता है, cosine चौड़ाई, और tangent इन दोनों का भागफल है — इसीलिए यह किसी एक दूरी की नहीं, दो दूरियों के बीच के रिश्ते की बात करता है। कर्ण इस अनुपात में कहीं नहीं आता, और यही इस पेज की सारी ख़ास बातों की जड़ है। जहाँ आसन्न भुजा शून्य हो जाती है वहाँ भाग का कोई जवाब नहीं बचता, और समकोण ठीक वही जगह है। नब्बे डिग्री और दो सौ सत्तर डिग्री — तथा इनके हर जुड़वाँ, जैसे माइनस नब्बे या चार सौ पचास — पर यह पेज जवाब देने से इनकार कर देता है। इनकार एक असली गणितीय बात है, कोई कमी नहीं: इन कोणों पर ढलान की रेखा लंबवत हो जाती है, और लंबवत रेखा की ढलान नापी ही नहीं जा सकती। यह भी ध्यान देने लायक़ है कि इनकार किसी बड़ी संख्या के रूप में नहीं आता — यह पेज ऐसी कोई संख्या छापकर यह नहीं कहता कि जवाब बहुत बड़ा है। दूसरी ख़ास बात यह है कि tangent सिर्फ़ आधे चक्कर पर दोहराता है, जबकि sine और cosine पूरे चक्कर पर। तीस और दो सौ दस डिग्री का tangent बराबर है, और इसीलिए नीचे की तालिका में एक ही आँकड़ा 0.5774 दो बार दिखता है — एक बार दूसरी पंक्ति में और एक बार दसवीं में। यह उन दोनों फलनों से उलटा व्यवहार है, जहाँ मान दोहराने के लिए पूरा चक्कर लगाना पड़ता है। और चिह्न का नियम भी इसी आधे चक्कर से बनता है: पहली चौथाई में tangent धनात्मक है, दूसरी में ऋणात्मक, और तीसरी में फिर धनात्मक — यानी ऋणात्मक कोणों की तरफ़ जाते हुए भी वही क्रम लौटता है। नीचे की संदर्भ तालिका बारह पंक्तियाँ छापती है और उनमें ठीक दो ख़ाने ख़ाली हैं, दोनों मान वाले ख़ाने में — नब्बे और दो सौ सत्तर डिग्री पर। बाक़ी दसों पंक्तियों में भरा हुआ मान है, और उनमें दो पंक्तियाँ ऐसी हैं जिनका जवाब जितना साफ़-सुथरा दिखता है उतना है नहीं: पैंतालीस डिग्री पर ठीक एक, और शून्य तथा एक सौ अस्सी डिग्री पर ठीक शून्य। बाक़ी सब अपरिमेय हैं और चार दशमलव तक काटे हुए। कोण डिग्री, रेडियन या ग्रेडियन में भरा जा सकता है और तीनों एक ही चीज़ के तीन नाम हैं: 180° = 200 grad = π rad। उलटी दिशा — tangent का मान दिया हो और कोण चाहिए — इस पेज पर नहीं होती, और वहाँ एक बात और भी है: हर मान के लिए एक नहीं, अनेक कोण होते हैं।
बारह कोणों पर tangent
| कोण (°) | tangent |
|---|---|
| 0 | 0 |
| 30 | 0.5774 |
| 45 | 1 |
| 60 | 1.7321 |
| 90 | — |
| 120 | -1.7321 |
| 135 | -1 |
| 150 | -0.5774 |
| 180 | 0 |
| 210 | 0.5774 |
| 270 | — |
| 330 | -0.5774 |
बारह पंक्तियाँ और उनमें ठीक दो ख़ाली ख़ाने — नब्बे तथा दो सौ सत्तर डिग्री पर — और यही इस तालिका की पहचान है। sine और cosine वाली तालिकाओं में एक भी ख़ाली ख़ाना नहीं मिलेगा; इस पेज पर वे दोनों इसलिए हैं कि वहाँ ढलान लंबवत हो जाती है और उसका कोई मान नहीं बनता। बाक़ी दस पंक्तियाँ भरी हुई हैं, और उन्हें पढ़ने का क्रम यह है: पहले पैंतालीस डिग्री की पंक्ति, जिसका जवाब ठीक एक है — इकलौता ऐसा जवाब। फिर दूसरी और दसवीं पंक्ति साथ रखिए: तीस और दो सौ दस दोनों पर 0.5774 लिखा है, जो आधे चक्कर वाले दोहराव का सीधा सबूत है — यही बात sine और cosine की तालिकाओं में पूरे चक्कर पर होती है। चिह्न का ढाँचा भी इसी क्रम से बनता है: पहली चौथाई धनात्मक, दूसरी ऋणात्मक, तीसरी और चौथी फिर धनात्मक। और 0 तथा 180 की पंक्तियाँ उस बात की गवाह हैं जिसे लोग सबसे ज़्यादा उलझाते हैं — वहाँ शून्य लिखा है, जो एक भरा हुआ जवाब है, न कि कोई छूटा हुआ ख़ाना।
फ़ॉर्मूला
tan θ = सामने की भुजा ÷ आसन्न भुजा tan θ = sin θ ÷ cos θ tan θ = ढलान
- कोण
- वह कोण जिसका tangent चाहिए, डिग्री, रेडियन या ग्रेडियन में। ऋणात्मक कोण भी चलता है और पूरे चक्कर से बड़ा भी — दोनों ही सूरतों में कोण पहले वृत्त पर उसकी सही जगह पर लाया जाता है। ख़ाना दोनों दिशाओं में 10,00,000 तक लेता है, और इस रेंज के भीतर नब्बे तथा दो सौ सत्तर डिग्री के हर जुड़वाँ पर इनकार किया जाता है
- सामने की भुजा / आसन्न भुजा
- समकोण त्रिभुज की वे दो भुजाएँ जो कर्ण के अलावा बचती हैं: कोण के सामने वाली भुजा और कोण से लगी आसन्न भुजा। tangent पहली बटा दूसरी है — कर्ण का इसमें कोई काम नहीं, और यही वजह है कि यह अनुपात आसन्न भुजा के शून्य होते ही टूट जाता है
- sin θ ÷ cos θ
- वही अनुपात बाक़ी दो फलनों के रूप में। यह रूप इनकार की जड़ सामने रख देता है: जहाँ cosine शून्य होता है वहाँ भाग का जवाब नहीं होता, और cosine ठीक नब्बे तथा दो सौ सत्तर डिग्री पर शून्य होता है
- ढलान
- इकाई वृत्त पर इस अनुपात का मतलब: केंद्र से उस बिंदु तक जाने वाली रेखा की ढाल जहाँ कोण पहुँचता है। एक का tangent पैंतालीस डिग्री की रेखा है, और जितना बड़ा आँकड़ा उतनी तेज़ ढलान — और जहाँ रेखा लंबवत हो जाए वहाँ ढलान का कोई मान ही नहीं
यह पेज तब काम आता है जब दो लंबाइयों का रिश्ता चाहिए, न कि कोई एक लंबाई: छत की ढलान कितनी तेज़ है, किसी सड़क का उतार कितना है, किसी बल का लंबवत हिस्सा उसके आड़े हिस्से से कितना गुना है। जहाँ भी सवाल में ऊँचाई और दूरी दोनों आएँ और जवाब एक अनुपात हो, वहाँ यही अनुपात माँगा जा रहा है। दूसरा इस्तेमाल उन जगहों पर होता है जहाँ आप जानते हैं कि कोण समकोण के आसपास है और जवाब बहुत बड़ा निकलेगा: तालिका में 89.99 जैसा कोई कोण नहीं है, पर अगर आप नब्बे के बहुत क़रीब जाएँगे तो आँकड़ा हज़ारों में पहुँच जाएगा, और अस्सी डिग्री पार करते ही वह पहले ही हज़ारों की तरफ़ बढ़ने लगता है। और जब तीन अनुपात एक साथ चाहिए — sine और cosine भी — तो त्रिकोणमिति वाला पेज तीनों एक साथ छापता है।
हल किए हुए उदाहरण
पैंतालीस डिग्री, इकलौता पूर्ण संख्या वाला जवाब
- पैंतालीस डिग्री पर समकोण त्रिभुज समद्विबाहु हो जाता है
- सामने की भुजा और आसन्न भुजा बराबर हो जाती हैं
- बराबर संख्याओं का भाग एक होता है, इसलिए tangent = 1
इन बारह पंक्तियों में यह अकेला कोण है जिसका tangent ठीक एक निकलता है — और यह संयोग नहीं बल्कि वह जगह है जहाँ ढलान ठीक पैंतालीस डिग्री की रेखा बनाती है। इसीलिए इकाई वृत्त पर सबसे पहचानने लायक़ ढलान यही है: एक का tangent यानी उतना ही ऊपर जितना आगे। हिसाब से देखें तो sine 0.7071 बटा cosine 0.7071 भी एक ही देता है, जो कोई दूसरा नियम नहीं, वही परिभाषा दूसरे रूप में है।
तीस डिग्री
- तीस डिग्री पर sine 0.5 होता है और cosine 0.8660
- एक-दूसरे का भाग लीजिए: 0.5 ÷ 0.8660
- जवाब 0.5774 आता है, जो तीन के वर्गमूल का उलटा है — यानी अपरिमेय, इसलिए काटा हुआ
0.5774 का सीधा मतलब यह है कि इस कोण पर चलते हुए आपके मुक़ाबले ऊँचाई थोड़ी कम बढ़ती है — ढलान एक से कम है, यानी पैंतालीस डिग्री से मंदी। आँकड़े की एक और पहचान यह है कि यह ठीक तीन के वर्गमूल का व्युत्क्रम है, जो हिसाब से तुरंत निकल आता है: sine में आधा और cosine में आधा गुणा तीन का वर्गमूल, दोनों का भाग करने पर तीन का वर्गमूल नीचे बचता है।
दूसरे चतुर्थांश का कोण, एक सौ पैंतीस डिग्री
- एक सौ पैंतीस डिग्री नब्बे से आगे है, यानी बिंदु बाईं ओर जा चुका है
- क्षैतिज दूरी ऋणात्मक हो गई इसलिए भाग का चिह्न भी उलट जाता है
- लंबाई वही पैंतालीस डिग्री वाली बचती है, इसलिए tangent = −1
ढलान की भाषा में इसका मतलब साफ़ है: रेखा उतनी ही तेज़ है, पर दिशा उलटी है — आगे बढ़ने पर ऊँचाई घटती जाती है। यहीं यह पेज sine और cosine दोनों से एक साथ अलग होता है, क्योंकि एक सौ पैंतीस डिग्री पर sine धनात्मक 0.7071 रहता है और cosine ऋणात्मक 0.7071, और उनका भाग ठीक माइनस एक बनता है। दोनों के चिह्न उलटे, इसलिए भाग का चिह्न भी उलटा।
दो सौ दस डिग्री, तीस से आधा चक्कर आगे
- दो सौ दस डिग्री तीस डिग्री से ठीक आधा चक्कर आगे है
- आधा चक्कर जोड़ने पर दोनों लंबाइयाँ एक साथ चिह्न बदल लेती हैं
- दोनों ऋणात्मक होने पर भाग वही धनात्मक 0.5774 रहता है
यह पंक्ति tangent के आधे चक्कर वाले दोहराव का सबसे साफ़ सबूत है और यहीं यह पेज बाक़ी दो अनुपातों से बुनियादी तौर पर अलग हो जाता है। तीस डिग्री और दो सौ दस डिग्री, दो पूरी तरह अलग जगहों पर बैठे कोण, एक ही tangent देते हैं — और यह इसलिए होता है कि दोनों की ऊँचाई और दूरी दोनों उलट जाती हैं, जिससे उनका भाग नहीं बदलता। त्रुटि की सबसे आम शक्ल यही है कि कोई इस आँकड़े को पहचानकर मान लेता है कि कोण तीस डिग्री है।
सीमाएँ
तीन बातें जान लेनी ज़रूरी हैं। पहली, नब्बे और दो सौ सत्तर डिग्री पर — और इनके हर जुड़वाँ, जैसे माइनस नब्बे या चार सौ पचास — पर जवाब देने से इनकार किया जाता है। यह इनकार किसी बड़ी संख्या के रूप में नहीं आता, क्योंकि जवाब बड़ा नहीं होता, होता ही नहीं: इन कोणों पर ढलान लंबवत है और लंबवत रेखा की ढलान परिभाषित नहीं। इसीलिए इन कोणों के आसपास बड़े आँकड़े मिलते हैं, पर किसी बड़े आँकड़े पर नहीं: अस्सी नौ दशमलव नौ नौ डिग्री पर मान 5,729.5779 आता है, उससे सात दशमलव आगे 89.9999999 डिग्री पर 57,29,58,006.0215, और नब्बे से ज़रा ही ऊपर 90.0000001 डिग्री पर वही आँकड़ा ऋणात्मक तरफ़ से आता है। ऊपर से देखने पर यह लग सकता है कि नब्बे डिग्री पर भी कोई बहुत बड़ा जवाब होगा और वह बस छप नहीं पा रहा; ऐसा नहीं है — इनकार एक अलग चीज़ है और वहीं होता है जहाँ ढलान खड़ी हो जाती है। तालिका में यह दो ख़ानों के रूप में दिखता है, और बारह में से दो ही ऐसे ख़ाने हैं। दूसरी बात, चिह्न और दोहराव: tangent केवल आधे चक्कर पर दोहराता है, इसलिए एक ही मान एक चक्कर में दो कोणों का होता है — तीस और दो सौ दस, पैंतालीस और दो सौ पच्चीस, और इसी तरह आगे भी। दूसरे चतुर्थांश में चिह्न ऋणात्मक हो जाता है और तीसरे में फिर धनात्मक। तीसरी बात, यह पेज उलटी दिशा में नहीं चलता, और उलटी दिशा यहाँ बाक़ी पेजों से भी ज़्यादा पेचीदा होती: एक ही tangent परिभाषित कोणों की पूरी अनंत श्रृंखला से मेल खाता है, हर आधे चक्कर पर एक, इसलिए वहाँ चुनाव सिर्फ़ दो में से नहीं, अनगिनत में से करना पड़ता है। जवाब चार दशमलव तक काटा हुआ है और ज़्यादातर अपरिमेय है: पैंतालीस डिग्री का एक और शून्य तथा एक सौ अस्सी डिग्री के शून्य ही ऐसे मान हैं जो ठीक-ठीक लिखे जा सकते हैं। कोण का ख़ाना दोनों दिशाओं में 10,00,000 तक जाता है और डिग्री, रेडियन तथा ग्रेडियन तीनों लेता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नब्बे डिग्री पर जवाब क्यों नहीं मिलता?
- क्योंकि वहाँ नीचे वाली भुजा शून्य हो जाती है। tangent सामने की भुजा बटा आसन्न भुजा है, और ठीक समकोण पर आसन्न भुजा की लंबाई शून्य रह जाती है — शून्य से भाग का कोई जवाब नहीं होता। जवाब बहुत बड़ा नहीं होता, होता ही नहीं: उस कोण पर ढलान की रेखा लंबवत हो जाती है और लंबवत रेखा की ढलान नापी नहीं जा सकती। यही बात दो सौ सत्तर डिग्री, माइनस नब्बे और चार सौ पचास पर भी लागू होती है, क्योंकि ये सब वही जगह हैं।
- नब्बे डिग्री के पास जाने पर आँकड़ा बहुत बड़ा क्यों हो जाता है?
- क्योंकि नीचे वाली भुजा शून्य की तरफ़ सिकुड़ती जाती है और उसी अनुपात में भागफल बढ़ता जाता है। अस्सी नौ दशमलव नौ नौ डिग्री पर मान 5,729.5779 आता है, और उससे ज़रा आगे बढ़ते ही वह लाखों में पहुँच जाता है। इससे यह नहीं निकलता कि नब्बे डिग्री तक पहुँचकर कोई अंतिम बहुत बड़ी संख्या मिल जाएगी; जैसे-जैसे कोण क़रीब आता है आँकड़ा बढ़ता रहता है और ठीक नब्बे पर कोई जवाब नहीं बचता, इसलिए वहाँ इनकार किया जाता है।
- तीस और दो सौ दस डिग्री का tangent एक ही क्यों है?
- क्योंकि tangent आधे चक्कर पर दोहराता है, पूरे चक्कर पर नहीं। दो सौ दस डिग्री तीस डिग्री से ठीक आधा चक्कर आगे है, और आधा चक्कर जोड़ने पर ऊँचाई तथा दूरी दोनों एक साथ चिह्न बदल लेती हैं — दोनों के ऋणात्मक हो जाने पर उनका भाग वही रहता है। sine और cosine में यह दोहराव पूरे चक्कर पर होता है, और यही इस पेज और उन पेजों का बुनियादी फ़र्क़ है।
- शून्य और एक सौ अस्सी डिग्री पर शून्य आता है, तो क्या वहाँ कुछ गड़बड़ है?
- नहीं, दोनों ठीक शून्य हैं और दोनों सही जवाब हैं। इन कोणों पर ढलान क्षैतिज होती है, और क्षैतिज रेखा आगे बढ़ने पर ऊँचाई में कुछ नहीं जोड़ती, इसलिए ढलान शून्य। इसे उन दो ख़ाली ख़ानों से नहीं मिलाना चाहिए जो नब्बे और दो सौ सत्तर पर दिखते हैं — यहाँ भाग चला और नतीजा शून्य निकला, वहाँ भाग चल ही नहीं सका। दोनों के बीच का फ़र्क़ इस पूरे पेज की सबसे काम की बारीक़ी है।
- कोण रेडियन में भर सकते हैं?
- हाँ, और डिग्री, रेडियन तथा ग्रेडियन तीनों चलते हैं, क्योंकि तीनों एक ही कोण के तीन नाम हैं: 180° = 200 grad = π rad। इनकार भी हर इकाई में उसी जगह होता है — रेडियन में नब्बे डिग्री 1.5708 है, और वहाँ भी जवाब नहीं मिलेगा। इकाई बदलने से सिर्फ़ आपका भरा हुआ कोण समझा जाता है; जवाब एक अनुपात है जिसका कोई पैमाना नहीं।
- किसी दिए हुए tangent से कोण कैसे निकालें?
- वह उलटी दिशा है और इस पेज पर नहीं होती — वहाँ व्युत्क्रम tangent कैलकुलेटर काम आता है, जो हर वास्तविक संख्या लेता है और कोण लौटाता है। यहाँ एक बात पहले से जान लेना अच्छा है: उलटी दिशा में हर मान के लिए एक कोण नहीं, हर आधे चक्कर पर एक कोण होता है, क्योंकि इसी पेज पर तीस और दो सौ दस जैसे दो कोण एक ही आँकड़ा देते हैं। इसलिए वह पेज एक मुख्य कोण चुनता है और बाक़ी इसी दोहराव से निकलते हैं।
संदर्भ
- Tangent — the opposite-over-adjacent ratio, its period of half a turn, and its poles at ninety and two hundred and seventy degrees — Wolfram MathWorld (United States)
- Trigonometric Functions — the definitions, ranges and domains of all six ratios, including the angles at which each of them is undefined — Wolfram MathWorld (United States)
- Cotangent — the reciprocal of this function, whose own poles sit at zero and one hundred and eighty degrees instead — Wolfram MathWorld (United States)
- Sine, Cosine and Tangent — a first-principles walk through the three ratios in a right triangle, with the special angles worked out rather than asserted — Math is Fun (United Kingdom)