त्रिकोणमिति कैलकुलेटर
नतीजा
sine
- cosine
- 0.8660
- tangent
- 0.5774
त्रिकोणमिति कैलकुलेटर एक कोण लेता है और उसके तीनों अनुपात लौटा देता है — sine, cosine और tangent। कोण भरिए, बग़ल की सूची से अंश, रेडियन या ग्रेडियन चुनिए, और तीनों संख्याएँ एक साथ आ जाती हैं: तीन ऐसी संख्याएँ जो बताती हैं कि वह कोण वृत्त पर कहाँ उतरता है। sine और cosine असल में एक ही बिंदु के दो निर्देशांक हैं। इकाई वृत्त खींचिए — त्रिज्या एक, केंद्र मूल बिंदु पर — x की धनात्मक दिशा से चलकर अपने कोण के बराबर घूम जाइए: जिस बिंदु पर आप रुकते हैं, उसका x-निर्देशांक cosine है और y-निर्देशांक sine। इसीलिए ये दोनों कभी एक से बाहर नहीं जाते। tangent उन्हीं दोनों का भागफल है, sine बटा cosine, और वह उसी बिंदु तक मूल बिंदु से जाती हुई रेखा की ढलान भी है। और चूँकि tangent एक निर्देशांक नहीं, एक भागफल है, इसलिए वह वह काम कर सकता है जो बाक़ी दो कभी नहीं करते: वह चलकर ख़त्म हो जाता है। जहाँ cosine शून्य हो जाता है — ठीक नब्बे डिग्री पर और ठीक दो सौ सत्तर डिग्री पर — वहाँ भाग देने के लिए कुछ बचता ही नहीं। उन दोनों कोणों पर tangent कोई बहुत बड़ी संख्या नहीं है, वह कोई संख्या ही नहीं है। यह पेज उन दो कोणों पर पूरा पाठ ठुकरा देता है और यह भी बता देता है कि ठुकराया कौन-सा कोण गया है, बजाय तीन में से दो संख्याएँ और एक बेतुका आँकड़ा छापकर यह अनुमान आप पर छोड़ने के कि उसका मतलब क्या निकाला जाए। और उससे ज़रा-सा हटा हुआ कोण, जैसे 89.99 डिग्री, एक बहुत बड़ी संख्या ज़रूर देता है — पर वह सचमुच एक बहुत बड़ी संख्या है, न होने वाली संख्या नहीं, और पेज उसे छापता है। नीचे दी त्रिकोणमिति सारणी बारह कोणों की है: चारों चतुर्थांशों से कम से कम एक-एक कोण, दोनों अक्षों से एक-एक, और tangent के दोनों उन कोणों से एक-एक जहाँ वह नहीं होता। तीनों अनुपात हर पंक्ति में हैं, और हर कोठरी उसी गिनती से निकलती है जिससे ऊपर का पैनल निकलता है, इसलिए सारणी का 0.866 और पैनल का 0.8660 कभी अलग नहीं पड़ सकते। फ़र्क़ सिर्फ़ यह है कि सारणी को कुछ ठुकराने की छूट नहीं है — वह एक नज़र में सब दिखाने के लिए बनी है, इसलिए जहाँ tangent नहीं होता वहाँ एक डैश छपता है, और ठीक उन्हीं दो जगहों पर पैनल पूरा पाठ ठुकरा देता है। ऋणात्मक कोण और पूरी परिक्रमा से बड़े कोण यहाँ कोई ख़ास हालत नहीं हैं, सामान्य इनपुट हैं। माइनस तीस डिग्री दक्षिणावर्त घूमना है, जो उसी बिंदु पर पहुँचता है जहाँ तीन सौ तीस डिग्री; और तीन सौ नब्बे डिग्री एक पूरी परिक्रमा से ज़्यादा है, यानी फिर से तीस डिग्री। सिर्फ़ आख़िरी जगह मायने रखती है, इसलिए पेज पहले कोण को घुमाकर एक चक्कर के भीतर लाता है और फिर तीनों अनुपात पढ़ता है — और इसीलिए इन तीनों के लिए नतीजे आख़िरी दशमलव तक एक जैसे आते हैं। यूनिट बदलने से भी कोण नहीं बदलता: एक सौ अस्सी डिग्री, दो सौ ग्रेडियन और π रेडियन एक ही कोण हैं, यह कोई अनुमान नहीं बल्कि इन तीनों लेखनों की परिभाषा है। सारे आँकड़े चार दशमलव तक छपते हैं — किताब से मिलान के लिए काफ़ी, और इस बात के प्रति ईमानदार भी कि इन कोणों की असली कीमतें वर्गमूल और भिन्न हैं, जिन्हें कोई दशमलव पूरा नहीं कर सकता।
बारह कोणों पर sine, cosine और tangent
| कोण (°) | sine | cosine | tangent |
|---|---|---|---|
| 0 | 0 | 1 | 0 |
| 30 | 0.5 | 0.866 | 0.5774 |
| 45 | 0.7071 | 0.7071 | 1 |
| 60 | 0.866 | 0.5 | 1.7321 |
| 90 | 1 | 0 | — |
| 120 | 0.866 | -0.5 | -1.7321 |
| 135 | 0.7071 | -0.7071 | -1 |
| 150 | 0.5 | -0.866 | -0.5774 |
| 180 | 0 | -1 | 0 |
| 210 | -0.5 | -0.866 | 0.5774 |
| 270 | -1 | 0 | — |
| 330 | -0.5 | 0.866 | -0.5774 |
बारह कोण, पूरे वृत्त से चुने हुए, और tangent के स्तंभ में छपे दो डैश इस तालिका की पूरी बात हैं: नब्बे डिग्री और दो सौ सत्तर डिग्री पर tangent का कोई मान नहीं है, और तालिका वहाँ कोई बड़ी संख्या छापने के बजाय यही बता देती है। पंक्तियाँ चुनने का ढंग भी सोचा-समझा है। दोनों अक्ष वाले कोण दो हैं, शून्य और एक सौ अस्सी, जहाँ sine शून्य और cosine माइनस एक या एक होता है; तीसरे चतुर्थांश के लिए दो सौ दस चुना गया है, दो सौ पच्चीस नहीं, क्योंकि दो सौ पच्चीस के तीनों आँकड़े पैंतालीस वाले ही होते हैं, बस चिह्न बदले हुए, जबकि दो सौ दस में तीनों कुछ नया बताते हैं। स्तंभ पढ़ने का ढंग ऐसा है: sine शून्य से चढ़कर पहले चौथाई चक्कर में एक तक जाता है, आधे चक्कर तक लौटकर शून्य हो जाता है, फिर ऋणात्मक होकर वापस आता है; cosine वही लहर एक चौथाई चक्कर पहले है; और tangent अलग क़िस्म का है, वह हर आधे चक्कर में दोहराता है, पूरे चक्कर में नहीं — इसीलिए शून्य से एक सौ अस्सी तक की चार पंक्तियों में ही उसकी पूरी कहानी आ जाती है। तालिका की हर कोठरी उसी गिनती से निकलती है जिससे ऊपर का पैनल, इसलिए तालिका का 0.866 और पैनल का 0.8660 कभी अलग नहीं पड़ सकते; सिर्फ़ इतना फ़र्क़ है कि पैनल पूरा पाठ ठुकरा देता है जहाँ तालिका एक डैश से काम चला लेती है।
फ़ॉर्मूला
sin θ = सामने की भुजा ÷ कर्ण cos θ = आसन्न भुजा ÷ कर्ण tan θ = sin θ ÷ cos θ
- कोण
- वह कोण जिसके तीनों अनुपात पूछे जा रहे हैं। अंश, रेडियन या ग्रेडियन में दिया जा सकता है, ऋणात्मक हो सकता है और पूरी परिक्रमा से बड़ा भी — मायने सिर्फ़ यह रखता है कि घूमकर आख़िर में वह वृत्त पर कहाँ उतरता है, इसलिए पेज पहले उसे एक चक्कर के भीतर ले आता है
- सामने की भुजा / आसन्न भुजा
- कोण वाले समकोण त्रिभुज की दोनों भुजाएँ: जो कोण के सामने पड़ती है और जो उससे लगी हुई है। त्रिज्या एक वाले वृत्त पर ये दोनों ही वे निर्देशांक बन जाती हैं जिन्हें sine और cosine पढ़ते हैं, और इनका भागफल ही tangent है
- कर्ण
- समकोण के सामने वाली सबसे लंबी भुजा। इससे भाग देना ही वह चीज़ है जो sine और cosine को माइनस एक और एक के बीच बनाए रखती है, और यही वजह है कि इन दोनों की कोई सीमा नहीं टूटती जबकि tangent की टूटती है
यह पेज एक सवाल का जवाब तीन तरह से देता है: कोण पता है, तो उसके sine, cosine और tangent क्या हैं? जब कोण पहले से मालूम हो तभी इस पर आइए — छत की ढलान जो डिग्री में पता है और अनुपात के रूप में चाहिए, कोई कला जो रेडियन में दी हुई है, कोई दिशा जिसे आप दो हिस्सों में बाँटने वाले हैं — और तीनों अनुपात एक साथ चाहिए, एक-एक करके नहीं। नीचे की त्रिकोणमिति सारणी इसी काम की है, क्योंकि आम तौर पर जो कोण लोगों के हाथ लगते हैं वे इन्हीं बारह में से कोई होते हैं, और तीनों को एक-साथ देखने पर ही यह पकड़ में आता है कि तीस का sine और साठ का cosine एक ही संख्या हैं। अगर तीनों में से सिर्फ़ एक चाहिए, तो उसके लिए अलग पेज हैं। और अगर कोण नहीं, बल्कि त्रिभुज की दो भुजाएँ पता हैं, तो समकोण त्रिभुज वाला पेज चाहिए, क्योंकि यहाँ तीनों अनुपात कोण से निकलते हैं, भुजाओं से नहीं। इसी तरह उलटी दिशा — किसी अनुपात से कोण निकालना — इस पेज का काम नहीं है: sine, cosine और tangent कोण देकर निकलते हैं, कोण वापस नहीं देते, और वह काम व्युत्क्रम वाले पेज करते हैं।
हल किए हुए उदाहरण
तीस डिग्री का कोण
- कोण पहले चतुर्थांश में है, इसलिए तीनों अनुपात धनात्मक आते हैं
- त्रिज्या एक वाले वृत्त पर तीस डिग्री का बिंदु है (√3/2, 1/2)
- इसलिए cosine, √3/2 है और sine, 1/2, और tangent इन दोनों का भागफल यानी √3/3
यह वह कोण है जिसके साथ पेज खुलता है, और नीचे की सारणी की पहली पंक्तियों में से एक भी। असली कीमतें हैं एक बटा दो, दो बटे तीन का वर्गमूल और तीन बटे तीन का वर्गमूल; यहाँ जो दशमलव छपा है वह उन्हीं तीनों को चार अंकों तक पूरा किया हुआ है। 0.5774 वाला आँकड़ा सबसे ध्यान देने लायक़ है — वह किसी वर्गमूल का तिहाई है, कोई आवर्ती दशमलव नहीं।
पैंतालीस डिग्री का कोण
- पैंतालीस डिग्री पर बिंदु y बराबर x रेखा पर पड़ता है, इसलिए दोनों निर्देशांक बराबर हैं
- बराबर निर्देशांकों का मतलब है कि sine और cosine एक ही संख्या हैं, √2/2
- दो बराबर संख्याओं का भागफल ठीक 1 होता है, और इसीलिए यहाँ tangent पूरा अंक है
नब्बे से नीचे यह अकेला ऐसा कोण है जिसका tangent पूरा अंक निकलता है — 0.9999 नहीं, ठीक 1.0000। sine और cosine दोनों 0.7071 हैं और पैंतालीस के बाद यही सबसे ऊँचा जोड़ा है जिस तक ये पहले चतुर्थांश में पहुँचते हैं: आगे बढ़ने पर sine चढ़ता रहता है और cosine उतरने लगता है। यह वह कोण भी है जहाँ sine बटा cosine करने पर जवाब साफ़-सुथरा आता है, इसीलिए किताबों में इसे अक्सर तुलना के लिए रखा जाता है।
दूसरे चतुर्थांश का कोण, एक सौ पैंतीस डिग्री
- एक सौ पैंतीस डिग्री समकोण से पैंतालीस डिग्री आगे है, इसलिए बिंदु दूसरे चतुर्थांश में चला गया
- उसका y-निर्देशांक अब भी धनात्मक है, इसलिए sine वही 0.7071 है
- उसका x-निर्देशांक ऋणात्मक हो गया, इसलिए cosine अब −0.7071 है
- धनात्मक को ऋणात्मक से भाग देने पर tangent ऋणात्मक आता है
इस उदाहरण का पूरा मतलब चिह्नों में है। एक सौ पैंतीस का sine पैंतालीस के sine के बराबर है, cosine का चिह्न पलट गया, और tangent भी उसी के साथ पलट गया। नीचे की सारणी में स्तंभ पढ़ते जाइए तो यही नक़्शा दिखता है: sine पहले दो चतुर्थांशों में धनात्मक रहता है और आख़िरी दो में ऋणात्मक, cosine नब्बे पर पलटता है, और tangent भी नब्बे पर ही पलटता है — यानी ठीक वहीं जहाँ वह ख़त्म होता है।
ऋणात्मक कोण, माइनस तीस डिग्री
- माइनस तीस डिग्री उलटी दिशा में यानी दक्षिणावर्त घूमना है
- एक पूरी परिक्रमा जोड़कर देखिए तो वही तीन सौ तीस डिग्री है, और बिंदु चौथे चतुर्थांश में पड़ता है
- चौथे चतुर्थांश में y-निर्देशांक ऋणात्मक है, इसलिए sine माइनस 0.5
- x-निर्देशांक धनात्मक रहता है, इसलिए cosine वही 0.866, और tangent दोनों का भागफल यानी ऋणात्मक
यह पंक्ति यह दिखाने के लिए है कि ऋणात्मक कोण कोई ख़ास हालत नहीं है: पेज पहले कोण को घुमाकर एक चक्कर के भीतर लाता है, और उसके बाद तीनों अनुपात उसी तरह पढ़ता है। इसीलिए माइनस तीस और तीन सौ तीस के तीनों आँकड़े आख़िरी दशमलव तक एक जैसे हैं; सिर्फ़ अगर आप घूमने की दिशा का हिसाब रख रहे हों, तो फ़र्क़ मायने रखता है।
सीमाएँ
चार बातें जान लेने लायक़ हैं। पहली, यह पेज कोण देकर अनुपात देता है, उलटी दिशा नहीं जाता। अगर आपके पास 0.5 है और आप वह कोण चाहते हैं जिसका sine इतना है, तो यहाँ वह नहीं मिलेगा — वह अलग सवाल है जिसका जवाब भी अलग तरह का होता है, क्योंकि 0.5 का sine एक से ज़्यादा कोणों का होता है, और उस काम के लिए व्युत्क्रम वाले पेज हैं। दूसरी, ठीक नब्बे डिग्री और ठीक दो सौ सत्तर डिग्री पर पेज पूरा पाठ ठुकरा देता है, बजाय tangent को किसी बहुत बड़ी संख्या से बदलने के। यही ठुकराव हर उस कोण पर लागू होता है जो घुमाने पर इन दोनों में से किसी पर उतरता है — माइनस नब्बे पर, चार सौ पचास पर, और उन सब पर जो इन्हीं दोनों से मिलते हैं। यह ईमानदार तरीक़ा है, पर इसका यह मतलब भी है कि जहाँ sine और cosine बड़े आराम से निकलते, वहाँ भी पूरा पाठ ठुकरा दिया जाता है। इसके उलट, पेज का ठुकराना एकदम निशाने पर है और उससे ज़रा-सा हटते ही नहीं रहता: 89.99 डिग्री का tangent 5,729.5779 छपता है और 90.0000001 डिग्री का −57,29,58,046.2243, यानी वहाँ वाक़ई एक बहुत बड़ी संख्या होती है और उसे छापा जाता है — ठुकराया सिर्फ़ ठीक नब्बे को जाता है, नब्बे के आस-पास को नहीं। तीसरी बात, कोण की ऊपरी सीमा दस लाख डिग्री है, जो रेडियन में करीब सत्रह हज़ार चार सौ तिरेपन बैठती है; सीमा की जाँच हमेशा डिग्री में बदलने के बाद होती है, इसलिए बीस हज़ार रेडियन भरना सीमा से ऊपर माना जाएगा, इसके बावजूद कि वह अपने आप में कोई बेतुका कोण नहीं है। चौथी बात, आँकड़े चार दशमलव तक छपते हैं, और इतने से इन कोणों की असली कीमतें नहीं दिखतीं: तीस का cosine यहाँ 0.8660 है और असल में तीन का वर्गमूल आधा, और कोई भी दशमलव इतना लंबा नहीं हो सकता कि उन्हें पूरा लिख दे, क्योंकि वे अपरिमेय हैं। यही वजह है कि उन कोणों की सटीक कीमतें अलग चार्ट में देखनी पड़ती हैं, और चार अंकों के भीतर छोटी-मोटी गड़बड़ दिख भी सकती है — तैंतीस दशमलव तीन तीन ग्रेडियन ठीक तीस डिग्री नहीं है, और उसका tangent यहाँ 0.5773 छपता है, न कि 0.5774।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नब्बे डिग्री पर tangent की कोई कीमत क्यों नहीं होती?
- क्योंकि tangent, sine बटा cosine है, और नब्बे डिग्री पर cosine शून्य हो जाता है। बिंदु वृत्त के ऊपर चला जाता है, उसका x-निर्देशांक शून्य रह जाता है, और भाग देने के लिए कुछ बचता ही नहीं। सही बात यही है कि वहाँ tangent का कोई मान नहीं है — यह नहीं कि वह बहुत बड़ा है। उसी कोण पर sine और cosine दोनों बड़े आराम से परिभाषित हैं, एक और शून्य, और नीचे की सारणी उन दोनों को आज भी दिखाती है। यही हाल ठीक दो सौ सत्तर डिग्री का है, क्योंकि घुमाने पर वह भी वहीं उतरता है — और इसीलिए माइनस नब्बे तथा चार सौ पचास भी वैसे ही ठुकरा दिए जाते हैं।
- कोण डिग्री में भरूँ या रेडियन में?
- जिसमें चाहें — ख़ाने के बग़ल में इकाई चुनने की सूची है, और दोनों तरह वही कोण पढ़ा जाता है। तीस डिग्री और 0.5236 रेडियन, चार दशमलव तक तीनों संख्याएँ एक ही देते हैं। ग्रेडियन भी वहीं मौजूद है, क्योंकि वह इसी कोण की तीसरी लिखावट है: एक सौ अस्सी डिग्री, दो सौ ग्रेडियन और π रेडियन तीनों एक ही कोण हैं, यह कोई अनुमान नहीं बल्कि इन लेखनों की परिभाषा है। फ़र्क़ सिर्फ़ तब दिखता है जब आप किसी ऐसी जगह से मिलान कर रहे हों जो एक ही इकाई मानकर चलती है, जैसे ज़्यादातर किताबें: जो किताब कहती है कि तीस का sine आधा है, वह डिग्री की बात कर रही है।
- नीचे की त्रिकोणमिति सारणी किस काम की है?
- बारह कोण, और हर पंक्ति में तीनों अनुपात। इन बारह में चारों चतुर्थांश आ जाते हैं, दोनों अक्ष आ जाते हैं, और वे दोनों कोण भी आ जाते हैं जहाँ tangent नहीं होता — यानी तीनों अनुपातों के चिह्नों के सारे जोड़ और tangent की दोनों जगहें एक ही जगह देखी जा सकती हैं। एक-एक स्तंभ ऊपर से नीचे पढ़िए तो हर अनुपात का नक़्शा ख़ुद बन जाता है: sine चढ़कर एक तक जाता है और लौट आता है, cosine वही लहर एक चौथाई चक्कर पहले है, और tangent हर आधे चक्कर में दोहराता है, पूरे चक्कर में नहीं। इसीलिए सारणी में बारह पंक्तियाँ होने के बावजूद tangent की पूरी कहानी शून्य से एक सौ अस्सी तक की चार पंक्तियों में ही आ जाती है।
- क्या कोण ऋणात्मक भी हो सकता है, या तीन सौ साठ डिग्री से बड़ा भी?
- दोनों हाँ, और दोनों सामान्य इनपुट हैं। ऋणात्मक कोण उलटी दिशा में यानी दक्षिणावर्त घूमना है, जो उसी बिंदु पर पहुँचता है जहाँ उसका धनात्मक साथी एक पूरी परिक्रमा जोड़कर पहुँचता है: माइनस तीस और तीन सौ तीस एक ही कोण हैं और तीनों आँकड़े आख़िरी दशमलव तक एक जैसे देते हैं। एक परिक्रमा से आगे का कोण भी चक्कर काटता रहता है — तीन सौ नब्बे फिर से तीस है। मायने सिर्फ़ आख़िरी जगह की रखती है, इसलिए पेज पहले कोण को घुमाकर एक चक्कर के भीतर ले आता है और उसके बाद तीनों अनुपात पढ़ता है।
- इस पेज और इकाई वृत्त वाले पेज में क्या फ़र्क़ है?
- दोनों एक ही कोण लेते हैं और आख़िरी दशमलव तक एक ही तीन संख्याएँ देते हैं — यह जान-बूझकर है, ताकि एक को दूसरे से मिलाकर जाँचा जा सके। फ़र्क़ इस बात में है कि दोनों किस चीज़ के इर्द-गिर्द बने हैं। इकाई वृत्त वाला पेज तस्वीर के इर्द-गिर्द है: त्रिज्या एक वाले वृत्त पर एक बिंदु, उसके निर्देशांक, और ख़ास कोणों की सटीक कीमतें जैसे तीन का वर्गमूल आधा। यह पेज अनुपातों के इर्द-गिर्द है और उन कोणों के इर्द-गिर्द जिन्हें खींचना मुश्किल है: ऋणात्मक कोण, पूरी परिक्रमा से बड़े कोण, और वे दो कोण जहाँ tangent का कोई मान ही नहीं।
- चार दशमलव ही क्यों, इससे ज़्यादा क्यों नहीं?
- क्योंकि चार अंक किताब के जवाब को ग़लत जवाब से अलग करने के लिए काफ़ी हैं, और उसके आगे के अंक कोण के बारे में नहीं होते। सारणी के ज़्यादातर कोणों की असली कीमतें वर्गमूल और भिन्न हैं, और उनके दशमलव न ख़त्म होते हैं न दोहराते हैं — तीस का cosine तीन का वर्गमूल आधा है, और 0.8660 उसी का एक कटा हुआ हिस्सा है, कोई दूसरी संख्या नहीं। ज़्यादा अंक छापना ऐसी सटीकता का दावा होता जो वहाँ है ही नहीं। छोटी-मोटी गड़बड़ भी इसी वजह से चार अंकों के भीतर दिख जाती है: तैंतीस दशमलव तीन तीन ग्रेडियन ठीक तीस डिग्री नहीं है, और उसका tangent 0.5773 छपता है, 0.5774 नहीं।
- कोण कितना बड़ा भरा जा सकता है?
- दस लाख डिग्री तक, दोनों दिशाओं में — यानी करीब सत्ताईस सौ अठहत्तर पूरे चक्कर। रेडियन में यह सीमा करीब सत्रह हज़ार चार सौ तिरेपन बैठती है, और जाँच हमेशा डिग्री में बदलने के बाद होती है। इसका एक नतीजा यह है कि बीस हज़ार रेडियन भरने पर पेज सीमा से ऊपर बताता है, हालाँकि कोण के तौर पर वह कोई अनोखी बात नहीं है — बस उसका डिग्री वाला रूप दस लाख से आगे निकल जाता है। इसके भीतर कोई सीमा नहीं है और पेज हर बड़े कोण को उसी तरह पढ़ता है जैसे छोटे को; दस लाख डिग्री पर भी तीनों अनुपात बराबर साफ़-सुथरे आते हैं।
संदर्भ
- Trigonometric Functions — the definitions of sine, cosine and tangent, their domains, and why the tangent is undefined where the cosine is zero — Wolfram MathWorld (United States)
- Sine — the function the unit circle reads off as the y-coordinate, its period, and the values it takes at the special angles — Wolfram MathWorld (United States)
- Tangent — the ratio the other two functions produce, its period of half a turn rather than a whole one, and its poles at ninety and two hundred and seventy degrees — Wolfram MathWorld (United States)
- Sine, Cosine and Tangent — a first-principles walk through the three ratios in a right triangle, with the special angles worked out rather than asserted — Math is Fun (United Kingdom)