cosine कैलकुलेटर
नतीजा
cosine
cosine कैलकुलेटर किसी भी कोण का cosine निकालता है — कोण की आसन्न भुजा और कर्ण का अनुपात, यानी इकाई वृत्त पर उस बिंदु का क्षैतिज निर्देशांक जहाँ कोण पहुँचता है। sine ऊँचाई पढ़ता है और cosine चौड़ाई: एक ही समकोण त्रिभुज से दोनों निकलते हैं, पर यह वाला बताता है कि बिंदु कितनी दूर दाईं ओर है, ऊपर कितना यह नहीं। तीन बातें इसे sine से अलग करती हैं और तीनों इस पेज पर सीधे दिखती हैं। पहली, cosine शून्य डिग्री पर अपने सबसे बड़े मान से शुरू होता है और वहाँ उसका मान ठीक एक होता है — sine शून्य से शुरू होता है — और इसीलिए पहली चौथाई में cosine उतरता है जबकि sine चढ़ता है। दूसरी, cosine एक सम फलन है: ऋणात्मक कोण पर वह वही मान लौटाता है जो उसके धनात्मक जुड़वाँ पर देता, इसलिए माइनस साठ डिग्री और साठ डिग्री दोनों 0.5000 हैं। यह वह जगह है जहाँ लोग sine की आदत लगाकर चिह्न उलट देते हैं, और यह पेज उसे नहीं उलटता। तीसरी, और सबसे व्यावहारिक, cosine कभी मना नहीं किया जाता — इसे चार दशमलव तक छापा जाता है और यह हर कोण पर छपता है। वजह भाग के नीचे बैठी है: cosine भी सामने की भुजा की तरह कर्ण से भाग देता है, और कर्ण किसी भी समकोण त्रिभुज में सबसे लंबी भुजा होती है, इसलिए भिन्न कभी एक से ऊपर नहीं जाती और नीचे वाला घटक कभी शून्य नहीं होता। यहीं यह पेज tangent से अलग हो जाता है, जहाँ भाग आसन्न भुजा से होता है और वह समकोण पर शून्य हो जाती है। नब्बे और दो सौ सत्तर डिग्री पर cosine का मान शून्य आता है, और वह शून्य असली जवाब है — न कोई छूटा हुआ ख़ाना, न कोई मना किया हुआ कोण। साठ डिग्री के बाद पहला चिह्न-पलटाव नब्बे डिग्री पर आता है: वहाँ से एक सौ अस्सी डिग्री तक cosine ऋणात्मक रहता है, एक सौ बीस डिग्री पर ठीक माइनस 0.5000, और एक सौ अस्सी पर माइनस एक, यानी अपना सबसे छोटा मान। नीचे की तालिका वही बारह कोण उसी क्रम में रखती है जो sine वाला पेज रखता है, पर यहाँ चारों चौथाई जुदा करने वाला चतुर्थांश वाला ख़ाना नहीं है — वह जानकारी sine वाले पेज पर है, क्योंकि चिह्न के साथ दिशा वहीं पढ़ी जाती है। कोण डिग्री, रेडियन या ग्रेडियन में भरा जा सकता है और तीनों एक ही चीज़ के तीन नाम हैं: 180° = 200 grad = π rad। जवाब चार दशमलव स्थानों तक जाता है और यह सिर्फ़ छपाई की हद है — साठ डिग्री का cosine आधा होता है, जो ठीक-ठीक लिखा जा सकता है, जबकि बयालीस डिग्री का नहीं। और अगर आपके पास cosine का मान है और कोण चाहिए, तो वह उलटी दिशा है और इस पेज पर नहीं होती: हर मान के लिए दो कोण होते हैं, एक ऊपर और एक नीचे के आधे हिस्से में।
बारह कोणों पर cosine
| कोण (°) | cosine |
|---|---|
| 0 | 1 |
| 30 | 0.866 |
| 45 | 0.7071 |
| 60 | 0.5 |
| 90 | 0 |
| 120 | -0.5 |
| 135 | -0.7071 |
| 150 | -0.866 |
| 180 | -1 |
| 210 | -0.866 |
| 270 | 0 |
| 330 | 0.866 |
बारह पंक्तियाँ, दो ख़ाने, और ऊपरी ख़ाना बारहों में भरा हुआ — इस पेज पर एक भी ख़ाली ख़ाना नहीं है। मान वाले ख़ाने को ऊपर से नीचे पढ़िए तो वह ठीक उस धनुष जैसा ढाँचा बनाता है जिसकी उम्मीद की जाती है: शून्य डिग्री पर सबसे ऊँचा एक, फिर गिरता हुआ नब्बे डिग्री पर शून्य, उसके बाद ऋणात्मक होकर एक सौ अस्सी पर माइनस एक, और वहाँ से वापस चढ़ता हुआ तीन सौ तीस पर 0.8660 तक। ऋणात्मक हिस्सा ठीक आधे चक्कर में फैला है — नब्बे से दो सौ सत्तर तक — और शेष आधे में मान धनात्मक रहता है। मान जोड़ों में दोहराते हैं: तीस और तीन सौ तीस, पैंतालीस और तीन सौ पंद्रह, साठ और तीन सौ, एक सौ बीस और दो सौ चालीस। हर जोड़ी क्षैतिज अक्ष के आइने में एक-दूसरे का प्रतिबिंब है, इसीलिए मान समान और चिह्न भी समान रहता है — यह वही बात है जिसे इस पेज का कोण ऋणात्मक होने पर भी मान न बदलने वाला गुण कहते हैं।
फ़ॉर्मूला
cos θ = आसन्न भुजा ÷ कर्ण cos θ = x ÷ r cos θ = cos(−θ)
- कोण
- वह कोण जिसका cosine चाहिए, डिग्री, रेडियन या ग्रेडियन में। ऋणात्मक कोण और पूरे चक्कर से बड़ा कोण दोनों चलते हैं — मायने सिर्फ़ इसका है कि कोण वृत्त पर कहाँ पहुँचता है। ख़ाना दोनों दिशाओं में 10,00,000 तक लेता है और उससे आगे की संख्या मना कर दी जाती है
- आसन्न भुजा / कर्ण
- समकोण त्रिभुज की वे दो भुजाएँ जो कोण उसमें होने पर मिलती हैं: कोण से लगी हुई भुजा जो कर्ण नहीं है, और सबसे लंबी भुजा यानी कर्ण। cosine इनमें पहली बटा दूसरी है — और चूँकि कर्ण हमेशा सबसे लंबा होता है, यह भिन्न कभी एक से ऊपर नहीं जाती
- x ÷ r
- वही अनुपात r त्रिज्या के वृत्त पर: x उस बिंदु की क्षैतिज दूरी है जहाँ कोण पहुँचता है। इकाई वृत्त पर r एक होता है, इसलिए cosine सीधे वही निर्देशांक बन जाता है, और तभी यह मान ऋणात्मक हो सकता है जबकि लंबाई नहीं
- कर्ण
- समकोण के सामने वाली सबसे लंबी भुजा। यह वह घटक है जिसकी वजह से cosine किसी कोण पर मना नहीं किया जाता: यह कभी शून्य नहीं होता, इसलिए नीचे का भाग कभी नहीं उड़ता, और यही बात इसे tangent से अलग करती है
इस पेज की ओर तब मुड़िए जब कोण पता हो और उसके साथ आने वाली क्षैतिज दूरी चाहिए — सीढ़ी का तल से लगाव, किसी बल का क्षैतिज घटक, किसी ढलान पर चले गए रास्ते का आड़ा हिस्सा। दूसरा और बराबर ज़रूरी इस्तेमाल चिह्न जाँचना है: एक सौ बीस डिग्री पर cosine माइनस 0.5000 है, और यह एक ही नज़र में बता देता है कि बिंदु बाईं ओर निकल चुका है, भले ऊँचाई अभी धनात्मक ही हो। जब किसी जोड़ी में एक तरफ़ का sine दिया हो और दूसरी तरफ़ का कोण पूरक हो, तो यह पेज उसे cosine में बदलने का सबसे छोटा रास्ता है, क्योंकि संपूरक कोण का cosine मूल कोण के cosine का ऋणात्मक होता है। तालिका को sine वाले पेज के साथ-साथ रखकर पढ़िए: वही बारह कोण, वही क्रम, और दोनों पंक्तियाँ मिलकर उस बिंदु के दोनों निर्देशांक दे देती हैं।
हल किए हुए उदाहरण
साठ डिग्री, जहाँ cosine ठीक आधा है
- समबाहु त्रिभुज को आधा काटने पर साठ डिग्री वाला समकोण त्रिभुज मिलता है
- साठ डिग्री से लगी छोटी भुजा कर्ण की ठीक आधी होती है
- इसलिए cosine = 1 ÷ 2 = 0.5, और यह मान धनात्मक है क्योंकि बिंदु दाईं ओर है
यह वह कोण है जिसके साथ पेज खुलता है और इन बारह पंक्तियों में सबसे साफ़ आधा। तीस डिग्री का sine भी ठीक आधा होता है और यह संयोग नहीं: एक ही त्रिभुज में तीस डिग्री के सामने वाली भुजा वही है जो साठ डिग्री से लगी हुई है, इसलिए दोनों अनुपात एक-दूसरे के उलटे हैं — यानी cos 60° = sin 30°। यह जोड़ी हर उस हिसाब की जाँच कर देती है जिसमें sine और cosine दोनों आते हैं।
शून्य डिग्री, जितना बड़ा cosine होता है उतना
- शून्य डिग्री पर बिंदु वृत्त के सबसे दाईं ओर के सिरे पर बैठता है
- आसन्न भुजा और कर्ण दोनों एक ही लंबाई के हो जाते हैं
- इसलिए cosine = 1, जो इस फलन का सबसे बड़ा मान है
एक यहाँ अधिकतम है, ठीक वैसे ही जैसे नब्बे डिग्री पर sine के लिए था, और इससे ऊपर cosine जा ही नहीं सकता। यह पंक्ति इस पेज की दिशा भी तय कर देती है: शून्य से आगे बढ़ते हुए मान गिरता है, नब्बे डिग्री पर शून्य तक पहुँचता है, और उसके बाद ऋणात्मक हो जाता है। जो लोग cosine को “शुरू से बढ़ने वाला” समझते हैं, उनके लिए यह पंक्ति सबसे तेज़ सुधार है।
दूसरे चतुर्थांश का कोण, एक सौ बीस डिग्री
- एक सौ बीस डिग्री नब्बे से आगे है, यानी बिंदु लंबवत अक्ष पार कर चुका है
- क्षैतिज दूरी अब बाईं ओर है, इसलिए मान ऋणात्मक होगा
- लंबाई वही आधी रहती है, इसलिए cosine = −0.5
इस पंक्ति में बदलती सिर्फ़ दिशा है, दूरी नहीं — साठ डिग्री और एक सौ बीस डिग्री दोनों पर बिंदु क्षैतिज अक्ष से बराबर दूर हैं, बस एक दाईं ओर और दूसरा बाईं ओर। यही वजह है कि cosine नब्बे डिग्री पर शून्य से गुज़रता है: वहाँ से पहले भाग दाईं ओर था और बाद में बाईं ओर, और बीच में ठीक अक्ष पर वह शून्य ही होता है। sine वाले पेज पर इसी कोण का sine अभी धनात्मक 0.8660 रहेगा, क्योंकि बिंदु अक्ष के ऊपर ही है।
ऋणात्मक कोण, माइनस साठ डिग्री
- माइनस साठ डिग्री अक्ष से नीचे की ओर जाता है, यानी दक्षिणावर्त
- क्षैतिज दूरी अब भी दाईं ओर ही है, बस ऊँचाई नीचे चली गई
- इसलिए cosine वही 0.5 रहता है जो साठ डिग्री पर था
यह पेज की सबसे ज़रूरी आदत दिखाती पंक्ति है: cosine ऋणात्मक कोण पर नहीं पलटता। वह केवल क्षैतिज दूरी पढ़ता है, और वृत्त के निचले आधे हिस्से में जाना दाएँ-बाएँ की स्थिति नहीं बदलता। sine इसी कोण पर चिह्न उलट देता है। इसीलिए किसी भी गणना में जहाँ कोण का चिह्न बदलता हो पर cosine का मान ज्यों का त्यों रहे, वहाँ गलती की गुंजाइश नहीं है — यह अपेक्षित व्यवहार है, कोई छूट नहीं।
सीमाएँ
तीन हदें साफ़ बता देना बेहतर है। जवाब चार दशमलव स्थानों तक छपता है और यह छपाई का चुनाव है, परिशुद्धता का दावा नहीं: साठ डिग्री का cosine ठीक आधा है और शून्य डिग्री का ठीक एक, जबकि बयालीस डिग्री जैसे आम कोणों का मान अपरिमेय होता है और 0.7431 जैसा आँकड़ा उसका कटा हुआ रूप है। तीन सौ साठ डिग्री तक के चक्कर में चार ऐसे कोण हैं जिन पर cosine का मान शून्य आता है — नब्बे, दो सौ सत्तर, और इनके दोनों ऋणात्मक जुड़वाँ — और वे शून्य असली जवाब हैं, ऐसे ख़ाने नहीं जिन्हें भरा न जा सका हो; यही बात इन्हें tangent वाले पेज के «—» से अलग करती है, जहाँ वह शून्य से भाग देने की नाकामी है। दूसरी हद यह है कि जवाब कभी माइनस एक से नीचे या एक से ऊपर नहीं जाता, इसलिए एक से बड़ा या माइनस एक से छोटा cosine कभी माँगा ही नहीं जा सकता — ऐसा मान दरअसल असंभव है, और यह पेज उसे बनाने की कोशिश भी नहीं करता। तीसरी हद यह है कि यह पेज उलटी दिशा में नहीं चलता: cosine 0.5 दिया हो तो कोण साठ डिग्री भी हो सकता है और तीन सौ डिग्री भी, और उन दोनों में जोड़े जा सकने वाले पूरे चक्कर अलग बात है। किसी दिए हुए cosine से इकलौता कोण चुनने के लिए एक फ़ैसला लेना पड़ता है — कौन-सा आधा हिस्सा — और वह फ़ैसला व्युत्क्रम cosine वाले पेज का है। कोण का ख़ाना दोनों दिशाओं में 10,00,000 तक जाता है; उससे बड़ी संख्या घटाकर छोटी करने के बजाय मना कर दी जाती है, क्योंकि उस आकार पर घटाना ख़ुद अपना मतलब खो देता है। डिग्री, रेडियन और ग्रेडियन तीनों चलते हैं और जवाब तीनों में एक ही आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- cosine किसी कोण पर मना क्यों नहीं किया जाता?
- क्योंकि इसके भाग के नीचे कर्ण बैठता है, और कर्ण किसी भी समकोण त्रिभुज में सबसे लंबी भुजा होती है — वह कभी शून्य नहीं होती। tangent के नीचे आसन्न भुजा होती है और वह समकोण पर शून्य हो जाती है, इसीलिए वहाँ भाग का कोई जवाब नहीं बचता। यह पेज नब्बे और दो सौ सत्तर डिग्री भी लेता है, और वहाँ मान शून्य आता है, जो एक असली जवाब है।
- शून्य डिग्री पर cosine एक ही क्यों होता है?
- क्योंकि शून्य डिग्री पर कोण से लगी भुजा और कर्ण एक ही भुजा बन जाते हैं, और कोई भी चीज़ ख़ुद से भाग देने पर एक देती है। यह इस फलन का सबसे बड़ा मान है — इससे ऊपर यह जा ही नहीं सकता, क्योंकि भिन्न का नीचे वाला हिस्सा हमेशा ऊपर वाले से बड़ा या बराबर होता है। इसी वजह से तालिका शून्य डिग्री पर इस पेज का सबसे बड़ा आँकड़ा दिखाती है और उसके बाद मान गिरने लगता है।
- ऋणात्मक कोण पर cosine का चिह्न नहीं बदलता, ऐसा क्यों?
- क्योंकि cosine क्षैतिज दूरी पढ़ता है, और वृत्त के निचले हिस्से में जाने से दाएँ-बाएँ की स्थिति नहीं बदलती। माइनस साठ डिग्री पर बिंदु अक्ष के नीचे होता है पर दाईं ओर ही, इसलिए मान वही 0.5000 रहता है। इसे सम फलन कहते हैं — आइने में बाएँ-दाएँ पलटने से मान नहीं बदलता — और sine इसके उलट विषम है, वह ऋणात्मक कोण पर चिह्न पलट देता है।
- नब्बे डिग्री पर शून्य आता है, तो क्या वहाँ जवाब नहीं है?
- जवाब है, और वह ठीक शून्य है — यह भरा हुआ ख़ाना है, छूटा हुआ नहीं। नब्बे डिग्री पर बिंदु ठीक लंबवत अक्ष पर बैठता है, इसलिए उसकी क्षैतिज दूरी शून्य है और cos 90° का मान भी शून्य। इसे tangent वाले पेज के ख़ाली ख़ाने से मिलाना नहीं चाहिए: वहाँ शून्य से भाग देने की नाकामी है और ख़ाना ख़ाली रह जाता है, जबकि यहाँ गणना पूरी हुई और नतीजा शून्य निकला।
- साठ डिग्री और एक सौ बीस डिग्री के मान बराबर क्यों नहीं, जबकि दूरी बराबर है?
- दूरी बराबर है पर दिशा उलटी है, और cosine दूरी के साथ दिशा भी गिनता है। एक सौ बीस डिग्री पर बिंदु लंबवत अक्ष के पार जा चुका है, इसलिए निर्देशांक ऋणात्मक है और मान माइनस 0.5000। यह चिह्न किसी त्रुटि का संकेत नहीं, जानकारी है: वह बताता है कि बिंदु बाईं ओर है। जहाँ सिर्फ़ लंबाई चाहिए वहाँ दोनों का निरपेक्ष मान एक ही रहेगा।
- कोण रेडियन में भर सकते हैं?
- हाँ, और डिग्री, रेडियन तथा ग्रेडियन तीनों चलते हैं, क्योंकि तीनों एक ही कोण के तीन नाम हैं: 180° = 200 grad = π rad। अट्ठावन दशमलव दो नौ छह रेडियन और तीस डिग्री एक ही कोण हैं, इसलिए जवाब एक ही आता है। एक ही सवाल में दो अलग इकाइयाँ मिला देना ही एकमात्र जाल है — साठ रेडियन और साठ डिग्री बिल्कुल अलग कोण हैं — और उससे बचने का तरीक़ा यह है कि चुनने वाली सूची में जो चुना हो, वही इकाई दिमाग़ में रखी जाए।
संदर्भ
- Cosine — the function the unit circle reads off as the x-coordinate, its even symmetry, and the values it takes at the special angles — Wolfram MathWorld (United States)
- Trigonometric Functions — the definitions of sine, cosine and tangent, their ranges, and why the cosine is defined everywhere while the tangent is not — Wolfram MathWorld (United States)
- Unit Circle — the circle of radius one, and why the coordinates of a point on it are the cosine and the sine — Wolfram MathWorld (United States)
- Sine, Cosine and Tangent — a first-principles walk through the three ratios in a right triangle, with the special angles worked out rather than asserted — Math is Fun (United Kingdom)