मुख्य सामग्री पर जाएँ
CalcMax

cotangent कैलकुलेटर

सीमा: -10,00,000 ° – 10,00,000 °

नतीजा

1.0000

cotangent

cotangent कैलकुलेटर किसी भी कोण का cotangent निकालता है — कोण से लगी आसन्न भुजा और उसके सामने वाली भुजा का अनुपात, यानी tangent का ठीक उलटा। ऊपर और नीचे की जगहें बदल जाने से इस पेज के दोनों इनकार भी अपनी जगह बदल लेते हैं, और यही इस पेज की सबसे ज़रूरी बात है। tangent वहाँ मना करता है जहाँ आसन्न भुजा शून्य हो जाती है, यानी नब्बे और दो सौ सत्तर डिग्री पर; cotangent वहाँ मना करता है जहाँ सामने की भुजा शून्य हो जाती है, यानी शून्य, एक सौ अस्सी और तीन सौ साठ डिग्री पर। दोनों के इनकार एक-दूसरे के ठीक बग़ल में बैठते हैं और एक-दूसरे को कभी नहीं छूते। इसका असर नीचे की तालिका में सीधे दिखता है, जहाँ दोनों अनुपात साथ-साथ छपते हैं: बारह में से चार पंक्तियों में कोई एक ख़ाना ख़ाली है, पर ऐसी एक भी पंक्ति नहीं जिसमें दोनों ख़ाली हों — और यह संयोग नहीं, यही इस जोड़ी की परिभाषा है। दूसरी बात यह है कि जहाँ एक अनुपात शून्य पर बैठता है वहाँ दूसरा मना करता है, और उलटा भी। नब्बे डिग्री पर tangent का कोई मान नहीं और cotangent ठीक शून्य है; शून्य डिग्री पर cotangent का कोई मान नहीं और tangent ठीक शून्य है। दोनों शून्य असली जवाब हैं, ऐसे ख़ाने नहीं जिन्हें भरा न जा सका — और इसीलिए इस तालिका को पढ़ते समय यह देखना ज़रूरी है कि ख़ाली ख़ाना किस अनुपात का है। एक आसान जोड़ी यह भी काम करती है: तीस डिग्री का cotangent साठ डिग्री के tangent के बराबर होता है, और साठ डिग्री का cotangent तीस डिग्री के tangent के बराबर — तालिका में पंक्तियाँ आपस में बदलकर देख लीजिए, आँकड़े अपनी जगह बदल लेते हैं। और पैंतालीस डिग्री एकमात्र कोण है जहाँ यह जोड़ी पूरी तरह बराबर हो जाती है, क्योंकि वहाँ सामने की भुजा और आसन्न भुजा दोनों एक ही हैं और उनका भाग दोनों तरह से एक आता है। cotangent का दोहराव भी आधे चक्कर पर होता है, पूरे पर नहीं, ठीक tangent की तरह। कोण डिग्री, रेडियन या ग्रेडियन में भरा जा सकता है और तीनों एक ही चीज़ के तीन नाम हैं: 180° = 200 grad = π rad। जवाब चार दशमलव तक काटा हुआ है, और जवाब जितना छोटा होता है उतना ही यह अनुपात बड़ा होता जाता है — नब्बे डिग्री की तरफ़ से हटते ही आँकड़ा हज़ारों में चला जाता है। उलटी दिशा — cotangent का मान दिया हो और कोण चाहिए — इस पेज पर नहीं होती, और वहाँ यह याद रखना ज़रूरी है कि हर मान एक कोण का नहीं, हर आधे चक्कर पर दोहराने वाले अनगिनत कोणों का होता है।

बारह कोणों पर tangent और cotangent, आमने-सामने

कोण (°)tangentcotangent
00—
300.57741.7321
4511
601.73210.5774
90—0
120-1.7321-0.5774
135-1-1
150-0.5774-1.7321
1800—
2100.57741.7321
270—0
330-0.5774-1.7321

यह तालिका दोनों अनुपात साथ रखती है और यही इसे सबसे उपयोगी बनाती है, क्योंकि दोनों के इनकार एक-दूसरे के बग़ल में बैठते हैं और कभी मिलते नहीं। बारह में से चार पंक्तियों में कोई एक ख़ाना ख़ाली है, पर एक भी पंक्ति ऐसी नहीं जिसमें दोनों ख़ाली हों: नब्बे और दो सौ सत्तर पर दूसरे ख़ाने में कोई मान नहीं जबकि तीसरे में शून्य या उसके आसपास का आँकड़ा है, और शून्य तथा एक सौ अस्सी पर ठीक उलटा होता है। पंक्तियों को जोड़े में पढ़िए: तीस और साठ के आँकड़े आपस में बदले हुए मिलेंगे — तीस का cotangent साठ के tangent जितना, और साठ का cotangent तीस के tangent जितना — और हर पंक्ति में दोनों ख़ानों का गुणनफल एक आता है, जो इस जोड़ी की परिभाषा है। पैंतालीस की पंक्ति अकेली है जहाँ दोनों ख़ानों में एक ही आँकड़ा है। और दोनों ख़ानों का चिह्न हमेशा एक जैसा रहता है, क्योंकि चिह्न पर कोण का चतुर्थांश तय करता है, यह नहीं कि भुजाएँ किस क्रम में लिखी गई हैं।

फ़ॉर्मूला

cot θ = 1 ÷ tan θ cot θ = आसन्न भुजा ÷ सामने की भुजा cot θ = cos θ ÷ sin θ

कोण
वह कोण जिसका cotangent चाहिए, डिग्री, रेडियन या ग्रेडियन में। ऋणात्मक कोण भी चलता है और पूरे चक्कर से बड़ा भी, और दोनों सूरतों में कोण पहले वृत्त पर उसकी सही जगह पर लाया जाता है। ख़ाना दोनों दिशाओं में 10,00,000 तक लेता है, और इसके भीतर शून्य तथा एक सौ अस्सी डिग्री के हर जुड़वाँ पर इनकार किया जाता है
आसन्न भुजा / सामने की भुजा
समकोण त्रिभुज की दोनों भुजाएँ, इस बार उलटे क्रम में: कोण से लगी आसन्न भुजा ऊपर और कोण के सामने वाली भुजा नीचे। यही उलटाव इस पूरे पेज की कुंजी है — जो अनुपात कल ऊपर था आज नीचे है, इसलिए जहाँ-जहाँ भाग टूटता है वे जगहें भी बदल जाती हैं
1 ÷ tan θ
वही अनुपात पहले से गिने हुए tangent से, यानी tangent का व्युत्क्रम। यह रूप यह भी बताता है कि जहाँ tangent शून्य होता है वहाँ cotangent नहीं बन सकता — और tangent ठीक शून्य, एक सौ अस्सी और तीन सौ साठ डिग्री पर शून्य होता है, जो इस पेज के इनकार के बिंदु हैं
cos θ ÷ sin θ
वही अनुपात बाक़ी दो फलनों के रूप में। यह रूप इनकार की जड़ दिखा देता है: जहाँ sine शून्य होता है वहाँ भाग का जवाब नहीं होता, और sine ठीक उन्हीं कोणों पर शून्य होता है जहाँ इस पेज पर मान नहीं मिलता

इस पेज की ओर तब मुड़िए जब सवाल tangent के उलटे रिश्ते का हो: दी हुई ऊँचाई के मुक़ाबले कितनी दूरी तय होगी, किसी ढलान पर चलकर कितनी ज़मीन नापी जाएगी, किसी त्रिभुज में आड़ी भुजा लंबवत भुजा से कितनी गुना है। इंजीनियरिंग और निर्माण की किताबों में यह अनुपात इसीलिए ज़्यादा दिखता है कि वहाँ अक्सर सवाल “जितना ऊपर जाना है उतने में कितना आगे जाना पड़ेगा” की शक्ल में आता है, और यह ठीक वही अनुपात है। दूसरा मौक़ा उन हालातों में आता है जहाँ ज़ीरो डिग्री के बहुत क़रीब का कोण बीच में पड़े — वहाँ यह अनुपात बहुत बड़ा हो जाता है, और तब यह देखना काम का है कि ख़ाने में जो मिला है वह सचमुच बड़ी संख्या है या इनकार। और जब तीनों में से कोई दूसरा अनुपात चाहिए तो बाक़ी पेज हैं: sine और cosine अपने-अपने पेजों पर, और तीनों एक साथ त्रिकोणमिति वाले पेज पर।

हल किए हुए उदाहरण

  1. पैंतालीस डिग्री, जहाँ जवाब ठीक एक है

    1. पैंतालीस डिग्री पर त्रिभुज समद्विबाहु हो जाता है
    2. सामने की भुजा और आसन्न भुजा बराबर हो जाती हैं
    3. उलटे क्रम में भाग देने पर भी जवाब 1 ही आता है

    यह इकलौता कोण है जहाँ cotangent और tangent दोनों एक ही आँकड़ा देते हैं, और वजह सीधी है — दोनों भुजाएँ बराबर हैं, इसलिए ऊपर-नीचे की जगह बदलने से भाग नहीं बदलता। इसीलिए इस तालिका की तीसरी पंक्ति बाक़ी सबसे अलग नहीं लगती; बाक़ी हर पंक्ति में दोनों ख़ाने एक-दूसरे के उलटे हैं, और यही उलटापन जोड़ी को सही रखता है — दोनों का गुणनफल हर पंक्ति में एक आता है।

  2. तीस डिग्री

    1. तीस डिग्री पर cosine 0.8660 है और sine 0.5
    2. एक-दूसरे का भाग लीजिए: 0.8660 ÷ 0.5
    3. जवाब 1.7321 आता है, जो तीन का वर्गमूल है — अपरिमेय, इसलिए काटा हुआ

    यहाँ आँकड़ा एक से बड़ा है, और इसका मतलब है कि इस कोण पर आगे बढ़ना ऊपर बढ़ने से तेज़ है — यानी ढलान पैंतालीस डिग्री से मंदी है, क्योंकि ऊँचाई दूरी के मुक़ाबले धीरे बढ़ती है। इसी आँकड़े का उलटा लेने पर तीस डिग्री का tangent बनता है, और वह 0.5774 निकलता है। यह जोड़ी तालिका में आमने-सामने देखी जा सकती है: तीस डिग्री का cotangent साठ डिग्री के tangent जितना ही होता है।

  3. दूसरे चतुर्थांश का कोण, एक सौ पैंतीस डिग्री

    1. एक सौ पैंतीस डिग्री नब्बे से आगे है, यानी बिंदु बाईं ओर जा चुका है
    2. cosine ऋणात्मक हो गया जबकि sine अभी धनात्मक है
    3. उनका भाग माइनस एक बनता है, और लंबाई वही पैंतालीस डिग्री वाली रहती है

    इस पंक्ति में तीनों अनुपातों का चिह्न-हिसाब एक साथ खुल जाता है: sine धनात्मक 0.7071, cosine ऋणात्मक 0.7071, इसलिए दोनों अनुपात ठीक माइनस एक हैं — अंतर सिर्फ़ यह कि यहाँ ऋण नीचे से ऊपर की तरफ़ भी पहुँचा है। चिह्न का मतलब ढलान की भाषा में यह है कि रेखा उतनी ही तेज़ है पर उलटी दिशा में, यानी आगे बढ़ने पर ऊँचाई घटती जाती है।

  4. नब्बे डिग्री, जहाँ cotangent शून्य है

    1. नब्बे डिग्री पर बिंदु ठीक लंबवत अक्ष पर पहुँचता है
    2. cosine ठीक शून्य हो जाता है जबकि sine एक
    3. शून्य बटा एक शून्य होता है, इसलिए cotangent = 0

    यह तालिका की सबसे शिक्षाप्रद पंक्ति है, क्योंकि इसमें एक ख़ाना ख़ाली है और दूसरे में ठीक शून्य लिखा है। नब्बे डिग्री पर tangent नहीं बनता क्योंकि उसका नीचे वाला हिस्सा शून्य हो जाता है, और cotangent शून्य बनता है क्योंकि उसका ऊपर वाला हिस्सा शून्य है — यही वह जोड़ी है जिसे लोग आपस में मिला देते हैं।

सीमाएँ

तीन हदें सीधी बातों में। पहली, इनकार शून्य, एक सौ अस्सी और तीन सौ साठ डिग्री पर होता है, और इनके हर जुड़वाँ यानी माइनस एक सौ अस्सी, पाँच सौ चालीस और सात सौ बीस पर भी। यह जवाब बड़ा नहीं होता, होता ही नहीं: इन कोणों पर सामने की भुजा शून्य हो जाती है और शून्य से भाग का कोई जवाब नहीं बनता। इसीलिए इन बिंदुओं के आसपास आँकड़े बहुत बड़े मिलते हैं पर ख़ुद बिंदु पर कुछ नहीं मिलता — शून्य दशमलव शून्य शून्य शून्य एक डिग्री पर मान 5,72,957.7953 आता है, और वहाँ से और क़रीब जाते ही वह लाखों की तरफ़ बढ़ता रहता है, जबकि ठीक शून्य पर कोई जवाब नहीं। तालिका में यह दो ख़ाली ख़ानों के रूप में दिखता है, और दोनों ख़ाली ख़ाने दूसरे अनुपात वाले ख़ाने में हैं, इस अनुपात वाले में नहीं। दूसरी बात, इस तालिका में चार पंक्तियों में कोई एक ख़ाना ख़ाली है, पर एक भी पंक्ति ऐसी नहीं जिसमें दोनों ख़ाली हों — नब्बे और दो सौ सत्तर पर tangent का मान नहीं बनता जबकि cotangent शून्य या शून्य के आसपास होता है, और शून्य तथा एक सौ अस्सी पर ठीक उलटा होता है। दो ख़ाली ख़ानों को एक ही पंक्ति में ढूँढ़ना बेकार है; वे एक-दूसरे की जगह कभी नहीं लेते। तीसरी बात, यह पेज उलटी दिशा में नहीं चलता, और उलटी दिशा यहाँ और भी पेचीदा है: एक ही cotangent अनगिनत कोणों का होता है, हर आधे चक्कर पर एक, इसलिए उस तरफ़ से लौटते समय एक नहीं, अनगिनत संभावनाओं में से चुनना पड़ता है। जवाब चार दशमलव तक काटा हुआ है और ज़्यादातर अपरिमेय है: पैंतालीस डिग्री का एक और नब्बे डिग्री का शून्य ही ऐसे मान हैं जो ठीक-ठीक लिखे जा सकते हैं। दोहराव आधे चक्कर पर होता है, पूरे पर नहीं, इसलिए तीस और दो सौ दस डिग्री एक ही cotangent देते हैं। कोण का ख़ाना दोनों दिशाओं में 10,00,000 तक जाता है और डिग्री, रेडियन तथा ग्रेडियन तीनों लेता है, और तीनों एक ही चीज़ के तीन नाम हैं: 180° = 200 grad = π rad।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

cotangent किन कोणों पर नहीं मिलता?
शून्य, एक सौ अस्सी और तीन सौ साठ डिग्री पर, और इनके हर जुड़वाँ पर — क्योंकि इन सब पर सामने की भुजा शून्य हो जाती है और cotangent का भाग उसी से होकर जाता है। ध्यान दीजिए कि ये जगहें tangent के इनकार से ठीक अलग हैं: tangent नब्बे और दो सौ सत्तर पर मना करता है। दोनों की सूचियाँ एक-दूसरे से टकराती नहीं, और यही इस जोड़ी की सबसे साफ़ पहचान है। शून्य डिग्री के बहुत क़रीब मान बहुत बड़ा मिलता है, पर ठीक शून्य पर कुछ नहीं मिलता। संकेत में लिखें तो cot 0° का कोई मान नहीं, जबकि cot 90° = 0।
नब्बे डिग्री पर cotangent शून्य क्यों होता है, जबकि tangent वहाँ मना करता है?
क्योंकि दोनों अनुपात उलटे हैं। नब्बे डिग्री पर आसन्न भुजा शून्य हो जाती है और सामने की भुजा पूरी होती है; tangent आसन्न भुजा से भाग देता है इसलिए वह टूट जाता है, और cotangent सामने की भुजा से भाग देता है इसलिए ऊपर शून्य बैठता है और जवाब शून्य आता है। एक ही पंक्ति में एक अनुपात ख़ाली और दूसरा शून्य — यह तालिका में देखा जा सकता है और यही इस पेज की सबसे काम की बारीक़ी है।
तीस डिग्री का cotangent साठ डिग्री के tangent जितना क्यों है?
क्योंकि इस जोड़ी में कोण और भुजाएँ आपस में बदल जाती हैं। तीस डिग्री के कोण के लिए जो भुजा सामने की है वही साठ डिग्री के कोण के लिए आसन्न भुजा हो जाती है, इसलिए एक का cotangent दूसरे के tangent के बराबर बनता है। तालिका में इसे आमने-सामने रखकर देखिए: तीस और साठ की पंक्तियों के आँकड़े उलटे क्रम में मिल जाते हैं, और बीच में पैंतालीस की पंक्ति है जहाँ दोनों अनुपात बराबर हो जाते हैं।
जवाब ऋणात्मक कब होता है?
जब कोण दूसरे या चौथे चतुर्थांश में हो, यानी नब्बे से एक सौ अस्सी डिग्री के बीच या दो सौ सत्तर से तीन सौ साठ के बीच, तथा हर ऋणात्मक कोण पर। वजह दोनों भुजाओं के चिह्नों में है: cotangent cosine बटा sine है, और उनमें से ठीक एक के ऋणात्मक होने पर भाग भी ऋणात्मक हो जाता है। पैंतालीस और दो सौ पच्चीस डिग्री का मान बराबर है पर चिह्न उलटा, और वही बात इस पेज के हर जोड़े पर लागू होती है।
cotangent का दोहराव कितने चक्कर पर होता है?
आधे चक्कर पर, पूरे पर नहीं — ठीक tangent की तरह और sine तथा cosine के उलट। तीस और दो सौ दस डिग्री का cotangent एक ही है, और इसकी वजह यह है कि आधा चक्कर जोड़ने पर दोनों भुजाएँ एक साथ ऋणात्मक हो जाती हैं, जिससे उनका भाग नहीं बदलता। इसका एक व्यावहारिक नतीजा यह है कि एक चक्कर में एक ही मान दो बार आता है, और इसलिए उलटी दिशा में जाते समय एक मान के पीछे अनगिनत कोण छिपे होते हैं।
कोण रेडियन या ग्रेडियन में भर सकते हैं?
तीनों इकाइयाँ चलती हैं और तीनों एक ही कोण के तीन नाम हैं, इसलिए जवाब बदलता नहीं: 180° = 200 grad = π rad। इनकार भी हर इकाई में उसी जगह होता है, क्योंकि वह कोण की इकाई पर नहीं, कोण की जगह पर टिका है। एक ही सवाल में दो इकाइयाँ मिलाना ही सबसे आम ग़लती है — चालीस रेडियन और चालीस डिग्री बिल्कुल अलग कोण हैं — और उससे बचने का तरीक़ा यह है कि ख़ाने के बग़ल वाली सूची में जो चुना हो वही इकाई दिमाग़ में रखी जाए।

संदर्भ

इससे जुड़े कैलकुलेटर